म्यूचुअल फंड
इसे इस नाम से भी जानते हैं: MF, mutual fund scheme
म्यूचुअल फंड कई निवेशकों का पैसा इकट्ठा करके उसे शेयरों, बॉन्ड या अन्य परिसंपत्तियों के पोर्टफोलियो में निवेश करता है, जिसे एक पेशेवर फंड मैनेजर सँभालता है।
जब आप म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं तो आप एक साझा कोष की यूनिट ख़रीदते हैं। वह कोष स्कीम के घोषित उद्देश्य के अनुसार निवेश किया जाता है, और उसमें जो कुछ है उसका आनुपातिक हिस्सा आपका होता है। इससे एक छोटे निवेशक को भी ऐसा विविध पोर्टफोलियो मिल जाता है जिसे अकेले बनाना व्यावहारिक नहीं होता।
स्कीमें मोटे तौर पर इस आधार पर बँटती हैं कि उनमें क्या है। इक्विटी फंड मुख्य रूप से शेयरों में निवेश करते हैं और इनमें सबसे ज़्यादा जोखिम तथा सबसे ज़्यादा दीर्घकालिक रिटर्न की संभावना होती है। डेट फंड बॉन्ड और सरकारी प्रतिभूतियाँ रखते हैं, जिनसे स्थिर पर कम रिटर्न मिलता है। हाइब्रिड फंड दोनों को मिलाते हैं। इंडेक्स फंड निफ्टी 50 जैसे बेंचमार्क को बहुत कम लागत पर बस दोहराते हैं, उसे हराने की कोशिश नहीं करते।
लागत ज़्यादातर निवेशकों की सोच से ज़्यादा मायने रखती है। एक्सपेंस रेशियो हर साल आपके निवेश के प्रतिशत के रूप में लिया जाता है, और डायरेक्ट प्लान — जो वितरक के बजाय सीधे फंड हाउस से ख़रीदे जाते हैं — रेगुलर प्लान से कम एक्सपेंस रेशियो रखते हैं। दशकों में वह अंतर एक बड़ी रकम में कंपाउंड हो जाता है।
भारत में म्यूचुअल फंड SEBI द्वारा नियंत्रित होते हैं, जो प्रकटीकरण, पोर्टफोलियो संरचना और स्कीमों के वर्गीकरण पर नियम बनाता है। नियमन परिचालन जोखिम घटाता है पर बाज़ार जोखिम नहीं हटाता: रिटर्न गारंटीड नहीं है, और इक्विटी फंड किसी भी साल गिर सकते हैं।